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newsbhartibikaner.com देव उठनी ग्यारस के पवित्र मुहूर्त पर, जिसे सनातन धर्म में विवाह के लिए सर्वोपरि माना जाता है, बीकानेर में एक अनोखी और यादगार शादी देखने को मिली। इस दौरान विवाह आयोजनों की भारी भीड़ के बीच, सबकी निगाहें सागर होटल, लालगढ़ पैलेस कैंपस में पहुंची एक बारात पर टिकीं। इस विवाह समारोह में दूल्हा अपनी दुल्हन को लेने के लिए हाथी पर सज-धजकर पहुंचा। इस अनूठी ‘शाही’ एंट्री ने न केवल समारोह को विशेष बनाया, बल्कि प्रशासन के सामने यातायात व्यवस्था संभालने की भी चुनौती खड़ी कर दी।

शाही अंदाज में इंजीनियर दूल्हे की एंट्री
बम्बलू हाऊस, अलख सागर रोड, बीकानेर निवासी ठाकुर नरपत सिंह भाटी यह पूरा परिवार किसी परिचय का मोहताज नहीं पिछली सात पीढ़ी से जैसलमेर महाराजा के वंशज हुकम सिंह प्रधान सेनापति रहे रूबरू में नरपत सिंह ने बताया की चूरू में शानदार जीत के साथ उनके दादो श्री हुकम सिंह जी बीकानेर के महाराजा ने उन्हें 12 गांव तोहफे में दिए थे नरपत सिंह के पिता श्री कृष्ण भक्ति में ली साधु बन गए उनके सुपुत्र अमित सिंह मोहन सिंह ऑन नरपत सिंह अपने परिवार के साथ बबलू हाउस में रह रहे हैं नरपत सिंह की सुपुत्री मनीषा कँवर का विवाह झुंझुनू जिले के ग्राम टाई निवासी ठाकुर मनोहर सिंह शेखावत के सुपुत्र कुलदीप सिंह शेखावत के साथ 2 नवंबर को निर्धारित था। ठाकुर मनोहर सिंह की गांव में बहुत उपजाऊ जमीन है ठाकुर साहब का ससुराल भी बीकानेर राजियासर हाउस है तय समय पर पेशे से इंजीनियर कुलदीप सिंह हाथी पर सवार होकर अपनी दुल्हन को लेने होटल सागर पैलेस पहुंचे। इस ‘यूनिक’ एंट्री ने राजसी परंपरा को जीवंत कर दिया और यह शादी शहर में चर्चा का विषय बन गई।

देव उठनी ग्यारस और धूमधाम
सनातन धर्म में देव उठनी ग्यारस को विवाह सहित सभी मांगलिक कार्यों के लिए ‘अबूझ मुहूर्त’ माना गया है। 2025 में देव उठनी एकादशी 1 नवंबर को थी और तुलसी विवाह 2 नवंबर को, जिससे इस दिन बड़ी संख्या में विवाह समारोह देखने को मिले। इस अवसर पर अपने विवाह को यादगार बनाने के लिए दूल्हों द्वारा तरह-तरह के आकर्षक तरीके अपनाए जा रहे हैं, जिनमें दूल्हे की एंट्री सबसे अहम है। कुलदीप सिंह शेखावत की हाथी पर सवारी इसी अनोखेपन को दर्शाती है।

यातायात और प्रशासनिक चुनौती
इस अनोखी और शाही बारात ने जहां सबका ध्यान खींचा, वहीं स्थानीय प्रशासन को यातायात व्यवस्था संभालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी। लालगढ़ पैलेस कैंपस और उसके आसपास के इलाके में दूल्हे के हाथी पर सवार होकर पहुंचने के कारण सड़क पर भीड़ जमा हो गई थी। हालांकि, इस अस्थायी अव्यवस्था के बावजूद भी इस अनोखी शादी ने बीकानेर के साहित्यिक और सांस्कृतिक माहौल में एक रोचक पहलू जोड़ दिया है।

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