सोलर कंपनियां नियमों की सरेआम उड़ा रही धज्जियां, सरकार की करोड़ों की भूमि को भी मनमाने तरीके से हड़पा

छतरगढ़. बीकानेर जिले में सौर ऊर्जा प्लांट लगाने की होड़ लगी हुई है। इसको लेकर सौर ऊर्जा कम्पनियां सरकार की ओर से जारी गाइडलाइन की अनदेखी कर करोड़ों रुपए का नुक़सान कर रही हैं। वहीं पर्यावरण एवं वन्य जीवों के लिए भी खतरा बन रही है। इसको लेकर विभिन्न समाजसेवी संस्थाओं में रोष व्याप्त है तथा जिला प्रशासन से इन पर कानूनी कार्रवाई करने का आग्रह किया है।
गौरतलब है कि खाजूवाला विधानसभा क्षेत्र को सौर ऊर्जा में सिरमौर बना रही सोलर कंपनियां जाने-अनजाने यहां पर्यावरण की बैरन बन गई हैं। करीब एक दर्जन कंपनियां न सिर्फ गांवों की हरियाली की लील रही है, बल्कि सामाजिक माहौल भी प्रदूषित कर रही है। कम्पनियों की लापरवाही के चलते सौर ऊर्जा प्लेटों की चोरियां भी आए दिन बढ़ रही हैं। इससे शांत क्षेत्र में अशांति फैल रही है।
समाजसेवी संस्थाओं के पदाधिकारियों ने केंद्र एवं राज्य सरकार की ओर से जारी गाइड लाइन की पालना नहीं करने वाली सौर ऊर्जा प्लांट लगा रही कम्पनियों पर तुरंत कार्रवाई करनी की मांग की है। गौरतलब है कि कुछ माह पहले लूणकरनसर व बज्जू क्षेत्र में ऊर्जा प्लांट की तारबंदी के पास मृत मिले हिरणों का मामला भी गरमाया था। पड़ताल करने पर सामने आया कि सौर ऊर्जा कम्पनी 24 बीघा की रजिस्ट्री करने के एक बीघा कटान के आम रास्ते के लिए आरक्षित जमीन को साथ लेकर पूरे पच्चीस बीघा जमीन पर कब्जा कर विभिन्न सौर ऊर्जा कम्पनी बेधड़क क्षेत्र में सौर ऊर्जा प्लांट लगा रहीं हैं। ऐसे में क्षेत्र में सौर ऊर्जा कम्पनी करोड़ों रुपए का राजस्व नुकसान राज्य सरकार को हो रहा है। प्रशासन भी इसे लेकर लापरवाह दिख रहा है।
बड़ी तादाद में काटे पेड़
जानकारी अनुसार खाजूवाला विधानसभा क्षेत्र में सोलर प्लांट कंपनियों ने बड़ी तादाद में पेड़ व खेजडिय़ां कटवा दिए। इससे पर्यावरण संतुलन बिगडऩे लग गया है। ग्रामीणों ने बताया कि प्लांट लगाने से पहले कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भरोसा दिलाया था कि गांवों की हरियाली को बढावा देने के लिए प्लांट के आसपास पौधारोपण किया जाएगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। हैरानी की बात यह है कि इसे लेकर शासन प्रशासन के अफसरों को अवगत करवाने के बावजूद जिम्मेदार अफसर कंपनियों पर लगाम कसने में नाकाम साबित हैं कुछ जगह दिखावे के लिए सौर ऊर्जा प्लांट में खेजड़ी छोड़ी गई है, ताकि अपनी बेगुनाही साबित कर सकें।
बाहरी लोगों से बिगड़ा माहौल
दूसरी ओर सोलर कंपनियों ने बड़ी तादाद में बाहरी प्रांतों के लोगों को काम पर लगा रखा है तथा कस्बे सहित अन्य जगह पर मकान किराए पर लेकर निवास कर रहे हैं, लेकिन इन लोगों ने पुलिस वेरीफिकेशन भी नहीं कराया गया है। इनमें शामिल संदिग्ध आचरण के लोग मांस मदिरा की पार्टियां कर गांवों का सामाजिक माहौल दूषित कर रहे हैं। इसे लेकर कुछ माह पहले ङ्क्षखचिया गांव के ग्रामीणों तथा कंपनी के कार्मिकों में भिड़ंत भी हो गई थी। बताया जाता है कि प्लांट के कार्मिकों ने गांव की एक युवती से छेड़छाड़ भी की थी। इससे माहौल गरमा गया। बाद में गांव के प्रमुख लोगों ने समझाइश कर माहौल शांत कराया। ऐसी स्थिति में ग्रामीण अपने आप को सुरक्षित महसूस नहीं कर रहा है।
अधिकारियों से साठ-गांठ का आरोप
सोलर प्लांट कंपनियों से जुड़े मामले की पड़ताल में कई तथ्य सामने आए हैं। पता चला है कि जनप्रतिनिधियों और अफसरों के साथ सांठगांठ के चलते यह कंपनियां ना सिर्फ नक्शे के विरूद्ध प्लांट लगा रही है, बल्कि हरियाली को भी उजाड़ रही है। इसे लेकर जिला कलक्टर कार्यालय से लेकर उपखंड कार्यालयों में शिकायतें हैं। इनकी सुध नहीं ली जा रही है। समाजसेवी रामकुमार सियाग ने बताया कि सौर ऊर्जा प्लांट कम्पनी की ओर से हजारों बीघा जमीन किसानों से खरीदी गई है। इसमें रजिस्ट्री पच्चीस बीघा की जगह चौबीस बीघा की संबंधित विभागीय कार्यालय से की गई है। एक बीघा कटान रास्ते का छोड़ा गया है। जानकारी अनुसार खेत में आवागमन करने के लिए एक बीघा का कटान रास्ता प्रस्तावित है और करीब एक बीघा जमीन एक से ढाई लाख रुपए कीमत की है। इसमें कम्पनी द्वारा हजारों बीघा भूमि अधिग्रहण की गई है। इस पर बंधित कम्पनियों पर कार्रवाई करनी चाहिए।
यहां लग रहे हैं सौर ऊर्जा प्लांट
खाजूवाला विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत छतरगढ़ के बंगराला, मोतीगढ़ के अलावा खाजूवाला विधानसभा क्षेत्र के जामसर, नूरसर, पूगल, बंदरवाला, बरजू सहित अन्य गांवों में भी करीब एक दर्जन से ज्यादा सोलर प्लांट लगाने का सर्वे पूरा हो चुका है। कई जगह कार्य दिन रात किए रहे हैं।
मामला संज्ञान में नहीं
&मेरे ध्यान में ऐसा कोई मामला अभी तक नहीं आया है। अगर कोई शिकायत दर्ज करवाता है तो संबंधित कम्पनी के खिलाफ उपखंड प्रशासन की ओर से तुरंत प्रभाव से मामला संज्ञान में लेकर कार्रवाई की जाएगी।
राजेन्द्र कुमार वर्मा, उपखंड अधिकारी छतरगढ़